आपका स्वागत है इस ऐतिहासिक और कृषि प्रधान समुदाय में
जहाँ काली मिट्टी की समृद्धि, गोंडवाना की विरासत और किसानों की मेहनत मिलकर जीवन को पुष्पित करती है।
जोवा के निकट स्थित 'बिंकी टोला' और आसपास की गुफाओं में प्रागैतिहासिक काल के शैल चित्र पाए गए हैं। यह नर्मदा घाटी की प्राचीन सभ्यता का हिस्सा है, जो पाषाण काल से मानव उपस्थिति को दर्शाता है।
15वीं-16वीं शताब्दी में यह क्षेत्र 'गोंड राजा संग्राम शाह' के 'बावन गढ़' साम्राज्य के अंतर्गत 'चौरागढ़' प्रशासनिक इकाई का हिस्सा था। यहाँ की कृषि संस्कृति में गोंडकालीन जल प्रबंधन की झलक आज भी मिलती है।
बीसवीं सदी की शुरुआत में (लगभग 1904), जब 'राजा गोकुल दास' (जबलपुर के प्रसिद्ध उद्योगपति) ने क्षेत्र में व्यापारिक विस्तार किया, तब करेली और उसके समीपवर्ती गाँवों जैसे जोबा में कपास की खेती को बढ़ावा मिला। रेलवे के विस्तार ने इसे एक प्रमुख कमर्शियल हब के रूप में स्थापित किया।
गाँव की आध्यात्मिक पहचान 'नर्मदा नदी' और पास के 'बरमान घाट' से जुड़ी है। यहाँ 'पोला' पर्व पर बैलों की पूजा और मकर संक्रांति पर नर्मदा स्नान की गहरी परंपरा है।
जोवा गाँव को वैश्विक पहचान यहाँ की बेटी 'तपस्या परिहार' (IAS 2018 बैच) से मिली। विवाह के दौरान 'कन्यादान' की रस्म को अस्वीकार कर उन्होंने गाँव की प्रगतिशील और आधुनिक सोच को देश के सामने रखा।
सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग
ब्राह्मण, जैन/बनिया, पटेल/कुर्मी
अनुसूचित जनजाति
गोंड समुदाय
अनुसूचित जाति
मेहरा समाज
लिंगानुपात
बाल लिंगानुपात
जोवा में 'भारी काली मिट्टी' (Deep Black Soil) पाई जाती है, जिसे स्थानीय स्तर पर 'काबरी' या 'कनहर' मिट्टी भी कहा जाता है। यह गन्ने और गेहूं की फसल के लिए विश्व की सबसे उर्वर मिट्टियों में से एक मानी जाती है।
जोवा के किसान अपनी फसल मुख्य रूप से 'करेली गुड़ मंडी' में बेचते हैं। यहाँ का 'कचिया' गुड़ अपनी शुद्धता और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। गन्ने की खेती यहाँ की समृद्धि का मुख्य स्रोत है।
गाँव में पशुपालन एक संगठित व्यवसाय बन चुका है। दूध की खरीदी के लिए 'FAT और SNF' आधारित पारदर्शी प्रणाली लागू है, जिससे छोटे किसानों को सीधा लाभ मिलता है।
गाँव 'करेली शहर से मात्र 3 किमी' की दूरी पर स्थित है, जिससे इसे शहरी सुविधाओं और ग्रामीण शांति दोनों का लाभ मिलता है।
हमारी नई डेयरी ऐप जल्द ही उपलब्ध होगी। उच्च गुणवत्ता वाला दूध, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और सीधा किसान-उपभोक्ता संपर्क।